लखनऊ के तालकटोरा रोड स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ श्री दुर्गा शक्ति मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली है, जो सदियों पुरानी आस्था का केंद्र है; यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्थानीय इतिहास का भी अभिन्न अंग है, जहाँ हर साल सभी पर्व एवं त्योहार बड़ी भक्ति और श्रद्धापूर्वक मनाए जाते हैं। इस शक्ति पीठ को जन-मानस मनोकामना पूर्ति केन्द्र मानते हैं.
अति प्राचीन: यह मंदिर कई सदियों पुराना माना जाता है, जहाँ पारंपरिक रूप से पूजा अर्चना की जाती है, जिससे इसकी ऐतिहासिक जड़ों का पता चलता है.
इसे मनोकामना शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है, जहाँ भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है, खासकर नवरात्रि के दौरान.
मंदिर का इतिहास लखनऊ के प्राचीन इतिहास से जुड़ा है और यह शहर की आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है.
यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र है, जहाँ प्रत्येक दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. प्रारंभ में जब मंदिर का नामकरण नही हुआ था, तब भी लोग अपनी आस्था अनुसार भुइयन देवी मन्दिर, हनुमान मंदिर, संतोषी माता मंदिर आदि नामों से जानते रहे हैं।
प्रति सोमवार बाबा महादेव का अद्भुत श्रंगार होता है। मंगलवार को हनुमान जी की कृपा वर्षा रहती है। बुधवार को विधिवत गणेश पूजन का विधान है। गुरुवार को श्री हरि विष्णु, गुरु महाराज व साईं भजन से भक्त अभिभूत रहते हैं। शुक्रवार को देवी पूजन, अर्चन व कीर्तन के माध्यम से माता का आशीर्वाद भक्तों को प्राप्त होता है। शनिवार को श्री सुन्दर काण्ड का नियमित पाठ का विधान होता है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन , जागरण व कन्या भोज के साथ प्रसाद वितरण किया जाता है। जन्माष्टमी, शिवरात्रि आदि पर्व बड़े धूम-धाम से मनाए जाते हैं। इसी प्रांगण में मुण्डन, कर्णछेदन एवं देवाई आदि सनातनी संस्कार बड़ी आस्था एवं विश्वास से पूर्ण किए जाते हैं।
यह मंदिर, तालकटोरा रोड पर स्थित, लखनऊ के सबसे पुराने और पूजनीय दुर्गा मंदिरों में से एक है. यहाँ सदियों से माँ दुर्गा की पूजा होती आ रही है, और यह मंदिर अपनी अद्भुत शक्ति और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. नवरात्रि के दौरान यहाँ का माहौल भक्तिमय हो जाता है, और भक्त माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.
इस मंदिर के वरिष्ठतम सेवक ( पुजारी - ब्रह्मलीन महंत गोमती प्रसाद जी ) के अनुसार " जहां हमारा ( मां दुर्गा जी का) जाप , वहां तुम्हारी ( हनुमानजी की)थाप" मां दुर्गा जी के साथ-साथ हनुमान जी प्रतिमा स्वरूप में स्वयं प्रकट हुए हैं।
उन्होंने ने ही बताया कि कठिन से कठिन समस्या के समाधान हेतु निर्बाध रूप से, बिना किसी व्यवधान के सात मंगलवार आकर श्री बजरंगबली जी का दर्शन-वंदन करने से समस्या का समाधान स्वयं श्री हनुमान जी करते हैं।इसी क्रम में भक्त नियमित रूप से दर्शन-पूजन करने आते रहते हैं।
मंदिर की इस पवित्र विरासत को ब्रह्मलीन पुजारी श्री ओम प्रकाश ने बड़ी भक्ति, आस्था और शुचिता से आगे बढ़ाया। वर्तमान में मुख्य पुजारी श्री अजय शास्त्री जी के प्रबंधन में मंदिर नित नवीन सोपानों का साक्षी है।
यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लखनऊ के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक ताने-बाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है.
नोट: हालांकि, इस विशिष्ट मंदिर के बारे में विस्तृत ऐतिहासिक दस्तावेज़ सीमित हैं, लेकिन इसकी पुरानी स्थापना और स्थानीय मान्यताएँ इसके गौरवशाली इतिहास की पुष्टि करती हैं.